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जनपदवार समाचार
 
विभाग की पृष्ठभूमि
समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित सरकारी समाचार की जांच के लिए 1933में एक प्रचार विभाग की स्थापना की गई। जिसमें प्रेस आपातकालीन शक्तियां अधिनियम 1931 को भी प्रश्स्त किया गया। गृह पुलिस विभाग के एक अनुभाग जो समाचार पत्र शाखा के नाम से जाना जाता था, को इसमें जोड़ दिए जाने के बाद इस विभाग का 1937 में ‘लोक सूचना विभाग’ के रूप में पुन: नामकरण किया गया।

विश्व युद्ध शुरू होने पर 1939में कांग्रेस मंत्रिमण्डल मे त्याग पत्र देने के बाद सूचना विभाग का इस्तेमाल युद्ध का प्रचार करने के लिए किया गया। देश के स्वतंत्र होने के बाद इसके संगठन एवं गतिविधियों में परिवर्तन आया, जबकि कार्य क्षेत्र के लिए 1947में सूचना निदेशालय इसमें सम्मिलित किया गया।

क्षेत्र प्रचार अधिकारियों, जिन्हें 1949में जिला सूचना अधिकारियों के रूप में पदस्थापित किया गया, की नियुक्तियां की गई। सामुदायिक श्रवण कार्यक्रम जिसका वर्ष 1939में ग्राम्य विकास विभाग में प्रादुर्भाव हुआ था और जो आकाशवाणी से प्रसारित पंचायत घर कार्यक्रम के श्रवण हेतु सुविधाएं प्रदान करता था को भी इस विभाग में 1947में स्थानान्तरित किया गया। प्रकाशन कार्य पर बेहतर नियन्त्रण की दृष्टि से 1 अप्रैल 1951 को विभाग में प्रकाशन ब्यूरों की स्थापना की गई।
 
पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत के साथ क्षेत्र प्रचार इकाइयों को अप्रैल 1953में योजना विभाग में स्थानान्तरित किया गया और जिला सूचना अधिकारियों को सहायक योजना अधिकारियों के रूप में पदस्थापित किया गया। यह व्यवस्था, तथापि असंतोषजनक पाई गई और इसलिए ये इकाइयां नवम्बर 1954 में सूचना निदेशालय में स्थानान्तरित कर दी गई। 1 अप्रैल 1953 को निदेशालय को स्थाई रूप से स्थापित किया गया था।
हिन्दी सलाहकार समिति जो मूलत :
1947 में शिक्षा विभाग के अन्तर्गत सरकार को पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों के चयन में परामर्श देने के लिए गठित की गई थी, का 1955-56 में पुनर्गठन किया गया और इसे हिन्दी समिति का नाम दिया गया। हिन्दी समिति का कार्य इस विभाग को जुलाई 16, 1960 से स्थानान्तरित किया गया। अनुदान प्राप्त से सहायता प्राप्त संगीत संस्थाओं उ-प्र- संगीत नाट्‌य भारती जो अब उ-प्र- संगीत नाटक अकादमी के नाम से जानी जाती है आदि जो 6 मार्च 1961 को सांस्कृतिक मामलों एवं विज्ञान अनुसंधान विभाग से सूचना विभाग को स्थानान्तरित किए गए थे के विषय 27 फरवरी 1967 को उस विभाग को पुन: स्थानान्तरित कर दिए गए।

09 नवम्बर 2000 को उत्तरांचल राज्य के गठन के फलस्वरुप 28 मार्च 2001 को ‘‘उत्तरांचल सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग’’ की स्थापना की गई।

सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग प्रदेश सरकार एवं जनता के मध्य समन्वय स्थापित करने हेतु सेतु की भूमिका निभाता है। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों, योजनाओं तथा निर्णयों के माध्यम से जो जनहितकारी कार्य सम्पन्न किये जाते है उनकी जानकारी विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा जनता तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण दायित्व सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग का है। लोक तंत्र में आवश्यक है कि जनता को उनके द्वारा चुनी हुई सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों की जानकारी संचार माध्यमों से मिलती रहे। इसी उद्देश्य से यह विभाग प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देश एवं प्रदेश के विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं, समाचार एजेसियों, आकाशवाणी, दूरदर्शन के साथ ही विभिन्न टेलीविजन चैनलों को उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त फिल्म, प्रदर्शनी, गीत एवं नाट्‌य तथा विभिन्न प्रचारपरक प्रकाशनों के माध्यम से सरकार की नीतियों, संकल्पों, प्रतिबद्धताओं तथा उपलब्धियों की विस्तृत एवं प्रमाणिक जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य विभाग द्वारा किया जाता है।
महानिदेशालय की मुख्य गतिविधियां निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत आती हैं
  • सूचना ब्यूरो
  • प्रेस प्रभाग
  • विज्ञापन प्रभाग
  • क्षेत्र प्रचार प्रभाग
  • प्रकाशन प्रभाग
  • गीत एवं नाट्‌य योजना
  • फोटो फिल्म शाखा
  • निरीक्षा शाखा
  • राज्य सूचना केन्द्र, नई दिल्ली
 
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